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Jan 27, 2012
| Author: उच्चारण
| Source: उच्चारण
दिल हमारा अब दिवाना हो गया है।
फिर शुरू मिलना-मिलाना हो गया है।।
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Jan 27, 2012
| Author: Mahendra Arya
| Source: Mahendra's Blog
एक और गणतंत्र दिवस
ऐसे देश का
जहाँ गणना है प्रचुर
लेकिन गण है नगण्य
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Jan 27, 2012
| Author: नवगीत की पाठशाला
| Source: नवगीत की पाठशाला
हट गया आवरण कोहरे का
सूरज ने खोले नयन कोर
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Jan 26, 2012
| Author: उच्चारण
| Source: उच्चारण
घर हमारे बने तबेले हैं
ज़िन्दग़ी में बड़े झमेले हैं
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Jan 26, 2012
| Author: वन्दना
| Source: ज़िन्दगी…एक खामोश सफ़र
नहीं हूँ मैं देशभक्त
क्या करूँ देशभक्त बनकर
जब रोज नए घोटाले करने हैं
जब रोज जनता को
लूटना खसोटना है
जब रोज भ्रष्टाचार के
नए नए मार्ग खोजने हैं
जब रोज सच का गला घोंटना है
जब रोज गणतंत्र के नाम पर
सब्जबाग दिखाना है
चेहरे पर ए ...
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Jan 26, 2012
| Author: नवगीत की पाठशाला
| Source: नवगीत की पाठशाला
रात अमा ने बाँधे घेरे
निशितारों ने डाले डेरे
उदयाचल के खोल झरोखे
सूरज तू तो जलते रहना
कलश ज्योत के भरते रहना
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Jan 25, 2012
| Author: शाहिद मिर्ज़ा ''शाहिद''
| Source: जज़्बात جذبات Jazbaat
एक क़ता हाज़िर है-
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Jan 25, 2012
| Author: अनुपमा त्रिपाठी...
| Source: anupama's sukrity!
षडज का स्वर ...
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Jan 25, 2012
| Author: उच्चारण
| Source: उच्चारण
गणतन्त्रदिवस की शुभवेला में,
आओ तिरंगा फहरायें।
देशभक्ति के गीत प्रेम से,
आओ मिल-जुलकर गायें।।
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Jan 25, 2012
| Author: दिगम्बर नासवा
| Source: स्वप्न मेरे................
लम्हा लम्हा
तुम जलती रहीं
कतरा कतरा
मैं पिघलता रहा
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Jan 25, 2012
| Author: रश्मि प्रभा...
| Source: मेरी भावनायें...
शब्दों के डार्ट पन्नों के डार्टबोर्ड सबके पास होते हैं
कोई डार्ट से सफलता के अंक लाता है
कोई पन्नों को बेशक्ल फाड़ देता है !
पन्नों को फाड़कर
किसी के अंक मिटाकर
वह भ्रम की उड़ान भरता है
' मैं जीत गया '
पर वह खुद को कचरे वाले गड् ...
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Jan 25, 2012
| Author: वन्दना
| Source: ज़ख्म…जो फूलों ने दिये
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Jan 25, 2012
| Author: नवगीत की पाठशाला
| Source: नवगीत की पाठशाला
सर्द रातों में लिखी है
अथक श्रम की नव कहानी
कृषक राजा कह रहा है
सुन रही है अवनि रानी
सर्द मौसम की कहानी
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Jan 25, 2012
| Author: मनोज कुमार
| Source: मनोज
स्मृति शिखर से... 4:
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Jan 24, 2012
| Author: सुमन'मीत'
| Source: ❀अर्पित ‘सुमन’❀
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Jan 24, 2012
| Author: उच्चारण
| Source: उच्चारण
खिल जायेंगे नव सुमन,
उपवन मुस्कायेगा!!
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Jan 24, 2012
| Author: shikha varshney
| Source: स्पंदन ( SPANDAN)
फ़्रांस की राजधानी पेरिस - द सिटी ऑफ़ लव, भव्यता, संम्पन्नता, ग्लेमर का पथप्रदर्शक.बाकी दुनिया से अलग एक शहर, जिसकी चकाचौंध के आगे सब कुछ फीका लगता है. लन्दन आने वाले हर व्यक्ति के मन में सबसे पहले इस फैशन की इस राजधानी को देख लेने की ...
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Jan 24, 2012
| Author: नवगीत की पाठशाला
| Source: नवगीत की पाठशाला
मकर राषि के सूर्य आज तो
लगते हैं लडडू गुड़-तिल के
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Jan 24, 2012
| Author: वन्दना
| Source: ज़िन्दगी…एक खामोश सफ़र
तुम लिखते नही
या मुझ तक पहुंचते नही
तुम्हारे वो खत
जिसकी भाषा ,लिपि और व्याकरण
सब मुझ पर आकर सिमट जाता है
शायद संदेशवाहक बदल गये हैं
या कबूतर अब तुम्हारी मुंडेर पर नही बैठते
या शायद तुमने दाना डालना बंद कर दिया है
तभी बहेलियों क ...
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Jan 23, 2012
| Author: पं.डी.के.शर्मा"वत्स"
| Source: ज्योतिष की सार्थकता
जीवन में भरपूर सुख और सफलता की प्राप्ति हर मनुष्य का एक सपना होता है। लेकिन सुख-दुख, गम-खुशी, अमीरी-गरीबी तथा रोग एवं स्वास्थ्य आदि कालचक्र के ऎसे धुरे हैं, जो जीवन के चलने के साथ-साथ ही चलते हैं. दुनिया में हर इन्सान किसी न किसी समस्या ...
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Jan 23, 2012
| Author: उच्चारण
| Source: उच्चारण
दिल-ए-ज़ज़्बात जब पिघलते हैं
शब्द तब शायरी में ढलते हैं
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Jan 23, 2012
| Author: Urmi
| Source: GULDASTE - E - SHAYARI
वो न आए उनकी याद वफ़ा कर गई,
उनसे मिलने की चाह सुकून तबाह कर गई,
आहट दरवाज़े की हुई तो उठकर देखा,
मज़ाक हमसे हवा कर गई !
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Jan 23, 2012
| Author: रश्मि प्रभा...
| Source: मेरी भावनायें...
कोई व्यक्ति
कोई जगह
कोई प्रश्न
कोई हल .... पूर्ण है क्या ?
किसी चित्रकार के चित्र में
क्या सारी रेखाएं सही होती हैं ?
क्या संस्कारों का एक ही परिणाम होता है ?
जो तुम सोच रहे
वही हर परिवेश की पृष्ठभूमि कैसे बन सकती है ?
युगों स ...
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Jan 23, 2012
| Author: नवगीत की पाठशाला
| Source: नवगीत की पाठशाला
सूरज के ढाबे पर फिर से
दहकी है तंदूरी आग
मौसम आज परोसे मक्के
की रोटी सरसों का साग
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Jan 23, 2012
| Author: मनोज कुमार
| Source: मनोज
ऐसा ही बचा हुआ गाँव है
श्यामनारायण मिश्र
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Jan 22, 2012
| Author: उच्चारण
| Source: उच्चारण
(चित्र गूगल छवियों से साभार)
चाँदी की थाली में, सोने की चम्मच से खाने वाले।
महलों में रहने वाले करते, घोटालों पर घोटाले।।
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Jan 22, 2012
| Author: नवगीत की पाठशाला
| Source: नवगीत की पाठशाला
ज्यों दिन
तिल-तिल बढ़ते जाते
दिनकर तेरी ज्योत बढ़े
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Jan 22, 2012
| Author: अनुपमा त्रिपाठी...
| Source: anupama's sukrity!
कोमल और कठोर ...
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Jan 21, 2012
| Author: गीत
| Source: गीत...............
आज यूँ ही
छत पर डाल दिए थे
कुछ बाजरे के दाने
उन्हें देख
बहुत से कबूतर
आ गए थे खाने .
खत्म हो गए दाने
तो टुकुर टुकुर
लगे ताकने
मैंने डाल दिए
फिर ढेर से दाने
कुछ दाने खा कर
बाकी छोड़ कर
कबूतर उड़ गए
अपने ठिकाने .
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Jan 21, 2012
| Author: रश्मि प्रभा...
| Source: मेरी भावनायें...
साँसों के जिंदा होने का सुकून बहुत बड़ा होता है
यूँ जीना तो बस एक मुहर है - वो भी नकली !
आत्महत्या आसान नहीं
गुनाह भी है
तो जबरदस्ती जीना - क्या गुनाह नहीं ?
जाने कितने लोग गुनहगार बन
कतरा कतरा साँसें ले रहे ...
और इनायत यह कि
प ...
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Jan 21, 2012
| Author: नवगीत की पाठशाला
| Source: नवगीत की पाठशाला
शीत से कँपती धरा की
ओढ़नी है धूप
कोहरे में छिप न पाये
सूर्य का शुभ रूप
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Jan 21, 2012
| Author: उच्चारण
| Source: उच्चारण
तीन साल का लेखा जोखा (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)
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Jan 21, 2012
| Author: Mahendra Arya
| Source: बातचीत
पिछले रविवार को भारत की क्रिकेट टीम आस्ट्रेलिया से तीसरा मैच भी बुरी तरह हार गयी . हार हमें बर्दाश्त नहीं . हमारे सारे हीरो जिन्हें हमने विश्व कप विजय के बाद आसमान पर बिठा रखा था , सभी अब जीरो हो गए . देश की सारी मिडिया का पूरा का पूर ...
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Jan 20, 2012
| Author: rashmi ravija
| Source: मन का पाखी
"नीलिमा..तुम मेरी बेटी जैसी हो....मैं तुम्हे बिलकुल ही गलत नहीं समझ रही....इन हालातो में ऐसा हो सकता है...मुझे ही देखो...आज पहला दिन है...बेटे -बहू का फोन भी आ चुका है..पति से भी बात हो चुकी है...पर इतना अकेलापन था....ये कुछ घंटे भी काट ...
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Jan 20, 2012
| Author: अनुपमा त्रिपाठी...
| Source: anupama's sukrity!
जल्दी जल्दी घर का काम निपटा कर गुनगुनाते हुए अपनी अलमारी खोली .......मैचिंग पर्स ...मैचिंग ज्वेलरी ....मैचिंग लिपस्टिक ...बड़े मन से सखियों से मिलने की तयारी होने लगी |आज बहुत दिनों बाद महिला मंडल की मीटिंग में जाना था |कुछ जोश ही अलग ...
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Jan 20, 2012
| Author: Mahfooz Ali
| Source: मेरी रचनाएँ !!!!!!!!!!!!!!!!!
मुझे पता नहीं क्यूँ कविता करने से बहुत डर लगता है..... एक तो यह कि कोई पढ़ता नहीं है और जो पढ़ भी लेता है तो वो अपना दिमाग लगा कर उसके मतलब में अपने हिसाब से एनालिसिस कर उस कविता को तहस नहस कर देता है और फ़िर ऊपर से मेरे जैसे को हिंदी ड ...
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Jan 20, 2012
| Author: गीत
| Source: बिखरे मोती
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Jan 20, 2012
| Author: उच्चारण
| Source: उच्चारण
सज्जनता का ओढ़ लबादा,
घूम रहे शैतान!
संकट में है हिन्दुस्तान!
संकट में है हिन्दुस्तान!!
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Jan 20, 2012
| Author: वन्दना
| Source: ज़िन्दगी…एक खामोश सफ़र
आज एक ख्याल ने जन्म लिया
स्त्री मुक्ति को नया अर्थ दिया
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Jan 20, 2012
| Author: नवगीत की पाठशाला
| Source: नवगीत की पाठशाला
उषा की अरुणिमा में
ऊँचाई माप रहे
संध्या की लाली में
गहराई झाँक रहे
जीवन भर सूरज सा
जलते ही जाना है
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Jan 20, 2012
| Author: उच्चारण
| Source: नन्हें सुमन
पापा की लग गई नौकरी,
देहरादून नगर बाबा।
कैसे भूलें प्यार आपका,
नहीं सूझता कुछ बाबा।।
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Jan 19, 2012
| Author: rashmi ravija
| Source: अपनी, उनकी, सबकी बातें
"नीलिमा..तुम मेरी बेटी जैसी हो....मैं तुम्हे बिलकुल ही गलत नहीं समझ रही....इन हालातो में ऐसा हो सकता है...मुझे ही देखो...आज पहला दिन है...बेटे -बहू का फोन भी आ चुका है..पति से भी बात हो चुकी है...पर इतना अकेलापन था....ये कुछ घंटे भी काट ...
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Jan 19, 2012
| Author: उच्चारण
| Source: उच्चारण
श्वेत कुहासा-बादल काले।
मौसम के हैं ढंग निराले।।
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Jan 19, 2012
| Author: शहरोज़
| Source: Hamzabaan हमज़बान
सिराज फैसल खान की ग़ज़लें
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Jan 19, 2012
| Author: वन्दना
| Source: ज़ख्म…जो फूलों ने दिये
ये कैसा चलन आया ज़माने का
सुनता है घुटती हुई चीखें
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Jan 19, 2012
| Author: नवगीत की पाठशाला
| Source: नवगीत की पाठशाला
चलते-चलते गूंगा सूरज
क्षण भर तल्ख़ तल्ख़ शब्दों में
जाने क्या क्या आज लिख गया
श्यामपट्ट पर शाम ढले।
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Jan 18, 2012
| Author: रश्मि प्रभा...
| Source: मेरी भावनायें...
" तुम थकती नहीं ?
तूफ़ान के मध्य भी कैसे खा लेती हो ?
कैसे हँस लेती हो ?
कैसे औरों के लिए सोच लेती हो ? "
..... पूछता था मेरा ही मैं मुझसे !
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Jan 18, 2012
| Author: अनुपमा त्रिपाठी...
| Source: anupama's sukrity!
भोर से पहले ही उठ जाती
सूखे सूखे त्रिण चुन लाती
बुलबुल सी उड़-उड़ ...
रे मन चुलबुल ...
बाग़ में चहचहाई है चिड़िया
मन भाई है चिड़िया ..!!
लो ,फिर आई है चिड़िया....
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Jan 18, 2012
| Author: उच्चारण
| Source: उच्चारण
फूल हो गये ज़ुदा, शूल मीत बन गये।
भाव हो गये ख़ुदा, बोल गीत बन गये।।
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Jan 18, 2012
| Author: नवगीत की पाठशाला
| Source: नवगीत की पाठशाला
धरती कभी न छोड़े चलना
सूरज कभी न जलना
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Jan 18, 2012
| Author: अनामिका की सदायें ......
| Source: अनामिका की सदाये...
कुटिल नीतिज्ञों के
हृदय कितने मलिन हैं
स्वयं हैं षड्यंत्र रचते
फांसते निरी नार हैं.
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Jan 17, 2012
| Author: करण समस्तीपुरी
| Source: मनोज
- करण समस्तीपुरी
"छौंरी पतरकी गे........ गोरिया खेतबा के आरी.... काहे मारे गजब पिहकारी.... !!" गौर-वर्ण, सुपुष्ट शरीर, जटा-जुटित मस्तक, हाथ मे डिबिया लिए, तुतली आवाज में यही गीत गाते घर से बथान पर जाते हुए जटा झा के प्रति पता नहीं कैसे ...
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Jan 17, 2012
| Author: पं.डी.के.शर्मा"वत्स"
| Source: ज्योतिष की सार्थकता
जीवन में भरपूर सुख और सफलता की प्राप्ति हर मनुष्य का एक सपना होता है। लेकिन सुख-दुख, गम-खुशी, अमीरी-गरीबी तथा रोग एवं स्वास्थ्य आदि कालचक्र के ऎसे धुरे हैं, जो जीवन के चलने के साथ-साथ ही चलते हैं. दुनिया में हर इन्सान किसी न किसी समस्या ...
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Jan 17, 2012
| Author: rashmi ravija
| Source: मन का पाखी
(काफी दिनों बाद कहानी पोस्ट कर रही हूँ....पर साथ में इसे दूसरे ब्लॉग 'अपनी-उनकी-सबकी बातें' पर भी पोस्ट करनी पड़ रही है वरना वहाँ मैं अन्य विषयों पर लिखना शुरू कर देती हूँ और कहानियों की बारी आती ही नहीं. यहाँ कमेन्ट ऑप्शन बंद कर दे रही ...
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Jan 17, 2012
| Author: दिगम्बर नासवा
| Source: स्वप्न मेरे................
जबकि मुझे लगता है
हमारी मंजिल एक थी
मैं आज भी नही जान सका
क्यों हमारा संवाद
वाद विवाद की सीमाएं लांघ कर
मौन में तब्दील हो गया
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Jan 17, 2012
| Author: उच्चारण
| Source: उच्चारण
ग्राह्य है सुगन्ध
त्याज्य है दुर्गन्ध
इसीलिए
न्यायपालिका ने
लिया है संज्ञान
फेसबुक और गूगल को
देना होगा ध्यान
हटाना होगा
अश्लील सामान
सावधान!
सावधान!!
बन्द करना होगा
ऐसे लोगों का पिटारा
जो प्रदूषित कर रहे हैं
गंगा की धारा
...
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Jan 17, 2012
| Author: वन्दना
| Source: ज़िन्दगी…एक खामोश सफ़र
काश ऐसा एक रोज़ हर किसी की ज़िन्दगी मे आये
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Jan 17, 2012
| Author: रश्मि प्रभा...
| Source: मेरी भावनायें...
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Jan 17, 2012
| Author: नवगीत की पाठशाला
| Source: नवगीत की पाठशाला
लहराईं नभ में उमंगें उमंगें
पतंगें पतंगें पतंगें पतंगें !
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Jan 16, 2012
| Author: rashmi ravija
| Source: अपनी, उनकी, सबकी बातें
(दस जनवरी को मेरे इस ब्लॉग के दो साल हो गए. जैसा कि मैने पहले भी जिक्र किया है...ये मेरा दूसरा ब्लॉग है, 'मन का पाखी ' ब्लॉग पर सिर्फ कहानियां ही पोस्ट करती हूँ....और कहानियों से इतर जो कुछ भी दिमाग में हलचल मचाये उसे इस ब्लॉग पर उंडेल ...
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